मुझे तुम याद आते हो
कभी तनहाइयों में यूँ
की जैसे रात हो जाती है
सूनी चाँद तारों बिन
की सूरज सो रहा हो
रौशनी बिन आ गया हो दिन
की फूलों ने महक अपनी
तिजोरी में छुपा दी हो
की पेड़ों ने न दी हो छांव
हर पत्ती गिरा दी हो
की बारिश मुझ तलक आकर
बदल दे रास्ता अपना
की बेरंगा सा दीखता हो
मुझे रंगों भरा सपना
की सूनापन अजब सा
जिंदगी में आके बस जाये
कोई देखे मेरा गम
और मेरी हालत पे हंस जाये






