Friday, May 18, 2012


तेरी यादों के जंगल में
कभी सोये, कभी खोये

कभी खुल के हँसे हम
और कभी छुप छुप के हम रोये

कभी कागज़ की कश्ती पर
सफ़र कर आ गए वापस

कभी हंस कर उदासी के
सभी नमो निशान धोये 

Friday, May 4, 2012

वक़्त

चीनी में चाय की तरह
लम्हा लम्हा घुलता वक़्त
कंधे पर उठाये
न जाने कितनी यादों का बोझ
चलता रहता है लगातार
और छांटता बीनता रहता है
अच्छे बुरे लम्हों को
कभी करता है कुछ बोझ हल्का
तो कभी बटोर लेता है
कुछ और नर्म मीठी यादें अपने झोले में
और यूँ ही चलते फिरते एक दिन
गुज़र जाता है वक़्त
फिर पलट कर
वापस न आने के लिए

Sunday, April 15, 2012

हवा के परों पर
है मेरी धरोहर
कहाँ कब तलक है
ये कैसे बताऊँ

हर एक रास्ता
मुझको अपना लगे है
किसे मोड़ समझू
मै किस राह जाऊं

भरे है खजाने
कई चाहतों के
मै सबको बता दूँ
या सबसे छुपाऊँ

जो यादें पलट कर
दिखाती है चेहरा
उन्हें याद रखूं
या फिर भूल जाऊं

मुझे देखकर
उनकी पलकें हुई नम
उन्हें चूम लूँ
या गले से लगाऊं

मुझे जिंदगी ने
सिखाया बहुत कुछ
है अब वक़्त आया
उन्हें आजमाऊं

Wednesday, March 28, 2012

ठहर जाने दो लम्हों को

ठहर जाने दो लम्हों को
बिखर जाने दो कुछ मोती
तुम्हारी याद के चादर तले
ये रात है सोती

सितारे आ टपकते हैं
मुझे तन्हा जो पाते हैं
ये जुगनू रात भर
मेरी तरह ही टिमटिमाते हैं

चुराने आ गए हैं फिर
मेरी आँखों के सब सपने
अँधेरे मेरे कानों में
बहुत कुछ बुदबुदाते है

पुराने से पिटारे कुछ
अभी भी अधखुले से हैं
कही रेशम से आंचल के
सितारे झिलमिलाते हैं

यूँ हम तो चल ही पड़ते हैं
वो जब आवाज़ देते हैं
लो अब हम भी उन्हें
आवाज़ देकर आज़माते हैं

शिकायत वो भला हमसे
करें किस बात की बोलो
जो न तो याद करते हैं
न हमको याद आते हैं

मुसाफिर जिस गली के हम रहे
माहों को. सालों को
कभी उनके परिंदे
हम तलक भी उड़ के आते हैं

Thursday, March 22, 2012

टूटता तारा


बहुत दिनों बाद
आज ऑनलाइन थी मै
मिला एक पुराना मित्र
मेरी ग्रीन लाइट देखते ही
उसका पहला शब्द
areeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyy??????
कहाँ थी तुम इतने दिनों से ??
कोई खबर क्यों नहीं दी ??
तुम्हे पता है क्या क्या हुआ इन दिनों?
मेरी शादी हो गयी
नौकरी छोड़ दी
अपना काम शुरू किया
तुम्हारा लिखा एक गाना गाया शो में
बहुत तारीफ हुई
फिर कुछ लिखना तो बताना.....

मै बोली तुम चुप हो तो मै कुछ बोलू
वो शर्मिंदा सा मुस्कुराया
मैंने कहा नींद आ रही है
जाती हूँ

वो बोला
पता है इतने दिनों बाद
तुम्हे ऑनलाइन देख कर कैसा लगा?
लगा टूटता तारा कैच लिया हो आज
कुछ देर तो महसूस करने दो इसकी रौशनी

और मै मुस्कुरा कर बोली
बीवी को बुलाओ
उसे भी टूटता तारा दिखाओ
मै देखना चाहती हूँ
उसकी रौशनी में और क्या क्या टूटता है...:)

Sunday, March 11, 2012

आइसक्रीम वाला


सड़कों का सन्नाटा
चटकीली धूप
सूखे गिरे पत्तों की सरसराहट
हवा की सांय सांय
इक्का दुक्का दिखते लोग
बड़े लाल घड़ों वाले ठेले के साथ
वो जलजीरे वाला
दूर किसी कालोनी में
आइसक्रीम वाले की गुहार
और मोटे पर्दों वाली खिडकियों से
झांक कर उसे रुकने का इशारा करते बच्चे
अठन्नी चवन्नी जोड़ कर
दौड़ती हुई आई कमली
आज फिर उदास लौटी है
अभी भी पच्चास पैसे कम पड़ गए
उसकी आइसक्रीम के लिए
लेकिन आस टूटी नहीं है
कल फिर आइसक्रीम वाला आयेगा
तब तक शायद अठन्नी का जुगाड़ हो जाये

Thursday, February 23, 2012

रात


कजरारी सी काली रातें
प्यार भरी कुछ मीठी बातें
कुछ तुम कहना, कुछ मै बोलू
रात सुनहरी हो जाएगी

होठों की नरमी को छूकर
जुगनू सी आँखों में खोकर
बाँहों में मुझको भर लेना
रात फिसल कर खो जाएगी

हाथों में जब हाथ थामना
जीवनभर का साथ थामना
रात भले कितनी काली हो
नर्म चांदनी बो जाएगी