आपकी यह छोटी सी कविता पढ़कर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई। आपने किसी की हँसी को बारिश से जोड़कर बहुत प्यारा चित्र बना दिया। सच कहूँ, आपकी यह रचना पढ़कर लगा जैसे ठंडी हवा और हल्की बारिश एक साथ मन को छू गई हो।
सन्नाटे को सुनने की कोशिश करती हूँ...
रोज़ नया कुछ बुनने की कोशिश करती हूँ...
नहीं गिला मुझको की मेरे पंख नहीं है....
सपनो में ही उड़ने की कोशिश करती हूँ.
अच्छी कविता
ReplyDeleteआप की पोस्ट बहुत अच्छी है आप अपनी रचना यहाँ भी प्राकाशित कर सकते हैं, व महान रचनाकरो की प्रसिद्ध रचना पढ सकते हैं।
ReplyDeleteआपकी यह छोटी सी कविता पढ़कर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई। आपने किसी की हँसी को बारिश से जोड़कर बहुत प्यारा चित्र बना दिया। सच कहूँ, आपकी यह रचना पढ़कर लगा जैसे ठंडी हवा और हल्की बारिश एक साथ मन को छू गई हो।
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