Sunday, January 10, 2010

टूट कर गिरना एकदिन
है ये तारों को पता
ये तो बस किस्मत है उनकी
है नहीं उनको खता
झिलमिलाना काम है
सो झिलमिलातें है सदा
आसमां को, बादलों को
प्यार देते है जता
काश हम भी सीख
उनसे कुछ ऐसी अदा
भूलकर सारे अँधेरे
देते दुनिया जगमगा

6 comments:

  1. काश हम भी सीख
    उनसे कुछ ऐसी अदा
    भूलकर सारे अँधेरे
    देते दुनिया जगमगा

    bahut sundar soch ....achchhi rachna...badhai

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  2. आसमां को, बादलों
    प्यार देते है जता
    काश हम भी सीख
    उनसे कुछ ऐसी अदा
    भूलकर सारे अँधेरे
    देते दुनिया जगमगा ....
    बेहद खूबसूरत.

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  3. बहुत अच्छा लिखा है आपने. आभार.

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  4. वो कहते हैं न 'सूरज अगर ढलता नहीं तो पूरब उसे मिलता नहीं "

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  5. बहुत सुन्दर रचना...

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  6. प्यार देते है जता
    काश हम भी सीख
    उनसे कुछ ऐसी अदा
    भूलकर सारे अँधेरे
    देते दुनिया जगमगा

    आशा और उम्मीद का दामन थामे लाजवाब रचना .........

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