Thursday, April 15, 2010

आँख की खिड़की जो खोलो मन का फाटक कर दो बंद

तुमने देखा बस वही
जो आँखों के आगे दिखा
काश देखा होता तुमने
मन के पीछे क्या छुपा
स्नेह में डूबे हुए मीठे से पल
हमने जो सींचा था वो भीगा सा कल
दर्द का और प्यार का हर एक लम्हा
बन गया था गीत और मीठी ग़ज़ल
पर तुम्हे क्या तुम वही देखो
जो तुमको है पसंद
आँख की खिड़की जो खोलो
मन का फाटक कर दो बंद
मै भी करके बंद
सारी खिड़कियाँ, सब रौशनी
आंसुओ की स्याही से
लिख डालूं कुछ भावुक से छंद

7 comments:

  1. स्नेह में डूबे हुए मीठे से पल
    हमने जो सींचा था वो भीगा सा कल
    कल की मिठास आज को भी मीठा कर देगा.
    सुन्दर रचना

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  2. आँख की खिड़की जो खोलो
    मन का फाटक कर दो बंद ...

    की होंगी आपनी खिड़कियाँ बंद
    मन का दरवाजा तो खुला था ..
    तभी तो रच गए इतने प्यारे छंद ...

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  3. बहुत सुन्दर रचना!

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  4. काश देखा होता तुमने
    मन के पीछे क्या छुपा
    स्नेह में डूबे हुए मीठे से पल
    हमने जो सींचा था वो भीगा सा कल
    दर्द का और प्यार का हर एक लम्हा
    bahut khoob...
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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  5. बहुत सुन्दर रचना!

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  6. ये है कविता ,एक -एक शब्द ह्रदय की असीम गहराइयों से लिखे गए हैं , जीवन के हर भाव को कविता में पिरोने की अदभुत क्षमता है आपमें ,दुःख ,विषाद के क्षणों में ऐसा सृजन निस्संदेह साहसपूर्ण है ,आपको मेरा अभिवादन

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