Tuesday, June 8, 2010

तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच


तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच
न जाने कितने ऐसे पल आये
जब भीड़ में होते हुए भी
दिखे सिर्फ तुम ही
सुना सिर्फ तुमको

तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच
हमें याद रहा की लंच टाइम हो गया
तुमने खाना खाया होगा या नहीं
खाना तुम्हे पसंद आया होगा या नहीं

तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच
मै दूर होते हुए भी तुम्हारे करीब थी
और दोपहर के खाने के बाद की जम्हाइयां बता रही थी की
तुम्हारी तकिये के आधे हिस्से पर
अभी भी मेरा ही हक है

तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच
वो सुबह की चाय साथ पीने के पल
तुम्हारा रसोईं घर में मेरे आस पास मंडराते रहना
पिछले दिन के ब्योरे का हिसाब किताब
और आज के दिन की जन्म कुंडली
यथावत चलती रही

तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच
ऑफिस के लिए तैयार होते वक़्त
मुझे मेकअप करते देख तुम्हारा जलन भी
कडवे शब्दों के पीछे छुपे
तुम्हारे अथाह प्यार को छुपा नहीं पाती

2 comments:

  1. तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच
    मै दूर होते हुए भी तुम्हारे करीब थी
    और दोपहर के खाने के बाद की जम्हाइयां बता रही थी की
    तुम्हारी तकिये के आधे हिस्से पर
    अभी भी मेरा ही हक है
    waah, kya baat hai

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  2. kya baat, kya baat, kya baat...!!!
    bahut sundar vichar...

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