Sunday, March 11, 2012

आइसक्रीम वाला


सड़कों का सन्नाटा
चटकीली धूप
सूखे गिरे पत्तों की सरसराहट
हवा की सांय सांय
इक्का दुक्का दिखते लोग
बड़े लाल घड़ों वाले ठेले के साथ
वो जलजीरे वाला
दूर किसी कालोनी में
आइसक्रीम वाले की गुहार
और मोटे पर्दों वाली खिडकियों से
झांक कर उसे रुकने का इशारा करते बच्चे
अठन्नी चवन्नी जोड़ कर
दौड़ती हुई आई कमली
आज फिर उदास लौटी है
अभी भी पच्चास पैसे कम पड़ गए
उसकी आइसक्रीम के लिए
लेकिन आस टूटी नहीं है
कल फिर आइसक्रीम वाला आयेगा
तब तक शायद अठन्नी का जुगाड़ हो जाये

10 comments:

  1. आस है तो जुगाड़ भी हो जाएगा ...

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  2. bahut hi sundar rachna, gave me a sense of nostalgic feeling... :)

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  3. काश किसी की कोई ख्वाहिश अधूरी ना रहे...
    सुन्दर रचना.

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  4. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  5. आशा ही तो जीवन है ... आज नहीं तो कर आइसक्रीम जरूर मिलेगी ... अच्छे भाव ...

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  6. ummid par to duniya kayam hai....sunder

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  7. वाह वाह - क्या सजीव चित्रण है - एक बार लगा - काश एक बार वही दिन लौट आते?

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
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