Friday, December 3, 2010



रात जाग कर काटी सारी
हर किताब क्यों इतनी भारी

प्रश्न पत्र यूँ हाथ में आया
जैसे कोई बड़ी बीमारी

खुसुर पुसुर, छींक और खांसी
उतरे चेहरे और उबासी

भूल गए सब जाने कैसे
मेहनत की थी अच्छी खासी

जैसे तैसे लिख डाला सब
समय उड़ गया न जाने कब

पता चलेगा बोया कटा
नंबर के फल आयेगे जब

6 comments:

  1. जैसे तैसे लिख डाला सब
    समय उड़ गया न जाने कब

    पता चलेगा बोया कटा
    नंबर के फल आयेगे जब

    arre vah,aap to bahut achchha likhti hain

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  2. sunder....mujhe apne exams yaad aa gayen:)

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  3. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों....बेहतरीन भाव....खूबसूरत कविता...

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  4. आदत.......मुस्कुराने पर
    माँ की परिभाषा........संजय भास्कर
    नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

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