Friday, December 10, 2010

जिंदगी

मुझे क्या पता जिंदगी कल क्या दिखाएगी
खुशियों की बरसात होगी या आंसुओं की झड़ी लगाएगी

आज को दुरुस्त करने की कोशिशों में लगी हूँ
ये मजबूती ही उस वक़्त साथ निभाएगी

किसको मिलता है सबकुछ इस जहाँ में
और सब मिल गया तो कुछ पाने की चाहत कहा रह जाएगी

थोड़े से अधूरेपन में ही है पूरापन
ये अधूरी चाहतें ही कुछ पाने को उकसाएंगी

3 comments:

  1. sunder rachna...
    good lines..
    किसको मिलता है सबकुछ इस जहाँ में
    और सब मिल गया तो कुछ पाने की चाहत कहा रह जाएगी

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  2. दिल को छू रही है यह कविता .......... सत्य की बेहद करीब है ..........

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