Friday, October 22, 2010



दर्द की दीवार पर कैसे लिखे लम्हा कोई
भीड़ में गुमसुम खड़ा है, है बहुत तन्हा कोई

7 comments:

  1. dard ki diwar ka kitna bada aakar hai ..
    dhondata huun ed sira duja sira milta nahi..
    ye diwaren ek si hain rung thode hai alag ,
    chot khane ka hai inki sisila thamta nahi...

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  2. तुझको सोचा तो पता हो गया रुसवाई को
    मैंने महफूज़ समझ रखा था तन्हाई को
    साथ मौजों के सभी हो जहाँ बहने वाले ,
    कौन समझेगा समन्दर तेरी गहराई को.

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  3. मन के कोने मे दबा दर्द कैसे बाहर आता है ।

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