
नज़र बचा कर भाग चलो
या कर लो लड़ने की तैयारी
रात और दिन जैसा जीवन
गम आयेगा बारी बारी
एक मुसीबत ख़तम हुई तो
एक हो गयी फिर से जारी
माना वो लम्हा है मुश्किल
जाना वो पल कितना भारी
जीत कहा जाएगी बचकर
गर होगी पूरी तैयारी
उतनी ही चटकीली सुबह
रात कटी हो जितनी काली